वो जो खुद को भूल गई थी

नेहा सबके लिए सब कुछ थी—एक अच्छी बेटी, समझदार पत्नी, जिम्मेदार बहू और प्यारी माँ।
लेकिन इन सब भूमिकाओं के बीच, वो खुद के लिए क्या थी… ये सवाल उसने कभी खुद से पूछा ही नहीं।

सुबह से रात तक उसका दिन दूसरों की जरूरतों में गुजर जाता। अगर कभी थकान महसूस होती, तो वो खुद से कहती—
“औरतों को तो ये सब करना ही पड़ता है…”

एक दिन, उसकी छोटी बेटी ने मासूमियत से पूछा,
“मम्मा, आप हमेशा सबका ख्याल रखती हो… आपका ख्याल कौन रखता है?”

ये सवाल सीधा नेहा के दिल में उतर गया।

उस रात, जब सब सो गए, नेहा आईने के सामने खड़ी हुई। उसने खुद को गौर से देखा…
वो चेहरा जो कभी सपनों से भरा था, आज सिर्फ जिम्मेदारियों से भरा हुआ लग रहा था।

अगले दिन, उसने एक छोटा सा कदम उठाया।
सुबह 15 मिनट सिर्फ अपने लिए निकाले—चाय के साथ शांति से बैठना।
फिर धीरे-धीरे उसने अपनी पुरानी पसंदें याद करनी शुरू कीं—गाना सुनना, डायरी लिखना, और कभी-कभी बस अकेले टहलना।

शुरू में उसे अजीब लगा… जैसे वो कुछ गलत कर रही हो।
पर फिर उसने महसूस किया—खुद का ख्याल रखना स्वार्थ नहीं, ज़रूरत है।

धीरे-धीरे नेहा बदलने लगी।
वो अब भी सबके लिए थी… लेकिन अब वो खुद के लिए भी थी।

एक दिन उसकी बेटी फिर उसके पास आई और मुस्कुराकर बोली,
“मम्मा, अब आप पहले से ज्यादा खुश लगती हो।”

नेहा ने उसे गले लगाते हुए कहा,
“क्योंकि अब मैंने खुद को भी अपना लिया है।”

सीख:
एक औरत सिर्फ दूसरों के लिए जीने के लिए नहीं बनी है।
उसका खुद का मन, सपने और खुशी भी उतनी ही अहम हैं।
खुद से प्यार करना ही सबसे बड़ी ताकत है। 💛

Marriage, Family & Boundaries

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