Meri 25 Saal Ki Khamoshi

आज मेरी 25th anniversary है…
घर में celebration की तैयारी हो रही है। मेरे husband ने शायद पहली बार इतने मन से कुछ plan किया है, मुझे surprise देने के लिए। सब लोग कहेंगे कि मैं कितनी lucky हूँ… 25 साल का साथ, भरा-पूरा परिवार, बच्चे, घर… सब कुछ। पर जाने क्यों, आज दिल में खुशी नहीं है।

पहले मैं अपने बारे में बताती हूँ… मेरा नाम Nidhi है। मैं एक well-off family से आती हूँ, जहाँ कभी किसी चीज़ की कमी नहीं रही। ऐसा नहीं था कि मेरे papa कोई business tycoon थे, वो government job में थे, लेकिन उन्होंने हमें हमेशा एक comfortable और सम्मान वाली जिंदगी दी। मैं पढ़ाई में average थी, मगर कुछ करने की चाह हमेशा थी। मेरी mummy चाहती थीं कि मैं working woman बनूँ, अपनी पहचान बनाऊँ। शायद भगवान ने उनकी सुन भी ली थी… मेरी job एक IT company में लग गई। मुझे खुद भी यकीन नहीं हुआ था कि मेरी जिंदगी इतनी अच्छी दिशा में जाएगी।

लेकिन शादी के बाद सब बदल गया। ससुराल वालों को मेरा job करना पसंद नहीं था। कहा गया कि “घर की बहू 8 से 9 की नौकरी नहीं करेगी।” और बस… मेरी दुनिया वहीं रुक गई। शुरू के 4-5 साल मेरे लिए किसी जेल से कम नहीं थे। हमेशा साड़ी पहनकर रहो, सिर ढककर रहो, balcony में मत खड़ी हो, अपनी माँ से ज्यादा बात मत करो… और भी न जाने कितनी बातें। धीरे-धीरे मैंने अपनी हर इच्छा को दबाना सीख लिया।

दो miscarriages के बाद जब मैं तीसरी बार pregnant हुई और मेरा बेटा आने वाला था, तब doctor ने complete bed rest कहा था। लेकिन घर के काम रुकते नहीं थे। शुरू के तीन महीने तक मैं काम करती रही। फिर जब doctor ने सख्ती दिखाई, तब जाकर घर वाले माने। लेकिन सातवां महीना आते-आते saas ki tabiyat खराब हो गई और मैं फिर काम में लग गई। शायद महादेव की कृपा थी कि मेरा बेटा ठीक सलामत इस दुनिया में आया। लेकिन उस दौरान जो तकरार, जो ताने, जो अकेलापन मैंने महसूस किया… उसने मेरे अंदर बहुत कुछ तोड़ दिया।

फिर बेटी के समय… और माँ के जाने के बाद… मैं पूरी तरह टूट चुकी थी। कई बार मन हुआ कि सब छोड़कर माँ के पास चली जाऊँ। लेकिन बच्चों का चेहरा देखकर हिम्मत नहीं हुई। भगवान जैसे बार-बार मेरी परीक्षा लेते रहे… और हर बार मेरा दिल थोड़ा और टूटता गया।

कभी-कभी सोचती हूँ… आखिर क्यों हर बार औरत को ही सहना पड़ता है? जिस इंसान के लिए अपना घर छोड़ा, अपनी पहचान छोड़ी, अपने सपने छोड़े… जब उसी को आपके होने या ना होने से फर्क न पड़े, तब इंसान अंदर से मरने लगता है।

माँ जब तक थीं, हमेशा यही समझाती थीं — “एक दिन सब ठीक हो जाएगा… एक दिन वो तुम्हें समझेंगे।” लेकिन वो दिन कभी नहीं आया। और फिर एक समय ऐसा आया जब मैंने अपने दिल का आखिरी टुकड़ा भी खुद से अलग कर दिया। अब बस बच्चों की जिम्मेदारियाँ पूरी करने के लिए जी रही हूँ।

और आज… वही husband उस शादी का celebration कर रहे हैं… उस रिश्ते का, जिसे उन्होंने शायद कभी सच में समझा ही नहीं… कभी समय ही नहीं दिया।

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Replies (2)

Nidhi ji, आपकी कहानी पढ़कर दिल सच में भर आया।
कई बार एक औरत अपनी पूरी जिंदगी रिश्तों को बचाने, परिवार को संभालने और सबको खुश रखने में लगा देती है… लेकिन उसके अपने दर्द को कोई देख ही नहीं पाता। आपने जो सहा, वो आसान नहीं था।

लेकिन एक बात जरूर कहूँगी — आपने खुद को टूटने नहीं दिया। इतने दर्द के बाद भी बच्चों के लिए खड़ी रहीं, हर जिम्मेदारी निभाई… यही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
हो सकता है लोगों ने आपके sacrifice को कभी शब्दों में ना समझा हो, लेकिन आपकी जिंदगी की हर लड़ाई आपकी हिम्मत की गवाही देती है। ❤️

Really, it’s a lot to suffer in a single life. I can’t even imagine what you must have gone through. Itna kuch sehna, aur phir bhi jeena… khush dikhna.

I know yahi sab insaan ko strong banata hai, but phir bhi dard to hota hai. Taklife hoti hain. Mann karta hai ki koi hame samjhe.

Marriage aajkal ajeeb si uljhan ban gayi hai. Jo akela hai woh chahta hai ki koi uski life mein aaye, aur jinki shaadi ho jaati hai, kai baar unhe lagta hai jaise unki apni life hi kahin kho gayi.

Sach mein, life bahut mushkil hai. But hats off to your courage. Itna kuch sehkar bhi tum ruki nahi, chalti rahi.

Main yeh nahi kahungi ki sab acha ho jayega… kyunki bahut kuch acha already hai. Bas dil ke zakhm hame woh acha dekhne nahi dete.

Shayad un zakhmon se thoda door chale jao, to dheere dheere woh bhi tumse door hone lagen.

Abhi ke liye, main bas itna hi keh sakti hoon.