राधिका हमेशा दूसरों के लिए जीती थी—घर, बच्चे, पति, ऑफिस… हर किसी की ज़रूरत उसके लिए पहले थी। लेकिन कहीं न कहीं, वो खुद को भूल चुकी थी। आईने में खुद को देखती तो लगता जैसे कोई अनजान सी औरत खड़ी है—थकी हुई, चुप, और कहीं खोई हुई।
एक दिन उसकी बेटी ने उससे पूछा,
“मम्मी, आप हमेशा इतनी थकी क्यों लगती हो? आप हंसती क्यों नहीं?”
वो सवाल राधिका के दिल में उतर गया।
उस रात उसने सोचा—आखिर आखिरी बार उसने अपने लिए क्या किया था? उसे याद ही नहीं आया।
अगली सुबह उसने एक छोटा सा फैसला लिया। बस 15 मिनट… सिर्फ अपने लिए।
वो जल्दी उठी, बालकनी में बैठी, चाय बनाई और सूरज को उगते हुए देखा। उस शांति में उसे कुछ महसूस हुआ—सुकून।
धीरे-धीरे ये 15 मिनट उसकी आदत बन गए। फिर उसने अपने खाने का ध्यान रखना शुरू किया, थोड़ा योगा, थोड़ा वॉक, और सबसे ज़रूरी—खुद से प्यार करना।
अब राधिका बदल रही थी। वही जिंदगी थी, वही लोग… लेकिन अब वो खुद को खो नहीं रही थी।
एक दिन उसकी बेटी फिर बोली—
“मम्मी, अब आप बहुत प्यारी लगती हो… खुश लगती हो!”
राधिका मुस्कुराई, क्योंकि अब उसे समझ आ गया था—
खुद का ख्याल रखना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि सबसे ज़रूरी जिम्मेदारी है।
सीख:
जब एक औरत खुद को समय देती है, तो वो सिर्फ खुद नहीं बदलती—उसकी पूरी दुनिया बदल जाती है।
इसलिए आज से… थोड़ा सा वक्त खुद के लिए भी निकालो।
आप deserve करती हो ❤️