काम तुम सारे करना,
घर को तुम सजाके रखना,
कोई मेहमान अगर आए तो,
अपनापन सा बनाके रखना।
बच्चों को तुम संभालना,
बड़ों का भी ख्याल तुम रखना,
यही तो चाहते हैं हम बस,
इतना सा तुम करके रखना।
जहाँ तुम कुछ चाहोगी,
वहीं पराई कहलाओगी,
घर अपना मानके बसाना,
पर पराई कहलाने पर भी मान जाना।
नहीं हक नाराज़ होने का,
बेटी नहीं तो मनाएंगे,
अगर नाराज़ हो गई तो,
हम भी तुमसे रूठ जाएंगे।